पंचायत चुनाव टालकर प्रशासक बैठाने की सुक्खू सरकार की साजिश बेनकाब, लोकतंत्र का गला घोंट रही कांग्रेस : संदीपनी भारद्वाज

47 शहरी निकायों में प्रशासक राज लागू कर जनता से छीना अधिकार, अब पंचायतों में भी भ्रष्टाचार का रास्ता खोलना चाहती है सरकार

शिमला टाइम
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का तथाकथित “मास्टर प्लान” अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है। पंचायत चुनावों को आगे खिसकाने और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जगह प्रशासक बैठाने का उद्देश्य साफ है—लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करना, सत्ता को अफसरशाही के हाथों में सौंपना और पंचायत स्तर पर अपने मित्रों व चहेतों को लाभ पहुंचाकर भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देना।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि पंचायत प्रधान और नगर निकायों के प्रतिनिधि जनता द्वारा चुने जाते हैं, वे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं और हर निर्णय के लिए जनता के सामने उत्तरदायी रहते हैं। लेकिन प्रशासक व्यवस्था में जवाबदेही समाप्त हो जाती है। अधिकारी अपनी सुविधा और सरकार के दबाव में फैसले लेते हैं, जिससे जनता की आवाज दब जाती है और भ्रष्टाचार के लिए रास्ते खुल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि पंचायत प्रधानों का कार्यकाल बढ़ता, तो उसमें जनता का हित होता, क्योंकि एक निर्वाचित प्रधान गांव के विकास, समस्याओं और जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध होता है। लेकिन कांग्रेस सरकार चाहती ही नहीं कि चुने हुए प्रतिनिधि जनता के हित में काम करें, क्योंकि कांग्रेस को डर है कि उसके भ्रष्टाचार और विफलताओं पर गांव-गांव सवाल उठेंगे।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार का लोकतंत्र विरोधी चरित्र पहले ही सामने आ चुका है। हिमाचल प्रदेश में समय पर शहरी निकाय चुनाव न करवा पाने के बाद अब सरकार ने प्रदेश के 74 नगर निकायों में से 47 में प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाकर तीन सदस्यीय समिति—सीईओ, ईओ और सचिव—को नगर निकायों का संचालन सौंप दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अधिसूचना के अनुसार अब स्थानीय एसडीओ को 1 लाख से 5 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार दे दिया गया है। भाजपा पूछती है कि जब जनता द्वारा चुनी हुई परिषदें और अध्यक्ष मौजूद थे, तब यह व्यवस्था क्यों नहीं बनी? कांग्रेस सरकार अब अफसरों के माध्यम से मनमाने फैसले लेना चाहती है और जनता के अधिकारों को समाप्त करना चाहती है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि नगर परिषदों और नगर पंचायतों में प्रशासक बैठाने के पीछे कांग्रेस का इरादा स्पष्ट है—निर्वाचित संस्थाओं को कमजोर करो, चुनाव टालो और अफसरशाही के जरिए अपने राजनीतिक एजेंडे को लागू करो। यही नहीं, कांग्रेस सरकार इस प्रशासक व्यवस्था को पंचायतों तक भी ले जाना चाहती है ताकि गांवों में विकास के नाम पर खुली लूट हो सके।
उन्होंने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल भी 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। अब प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि क्या कांग्रेस सरकार पंचायतों में भी प्रशासक नियुक्त कर लोकतंत्र का अंतिम स्तंभ भी गिराना चाहती है? क्या गांवों में भी जनता की सरकार हटाकर अफसरों का शासन चलाया जाएगा?
भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री पर सीधा हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं गृह विभाग, वित्त विभाग और प्रशासन के सर्वेसर्वा बने हुए हैं। फिर भी चुनाव समय पर क्यों नहीं हो पा रहे? यह असफलता नहीं, बल्कि जानबूझकर रची गई रणनीति है ताकि चुनावों से भागकर सत्ता का दुरुपयोग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का यह रवैया लोकतंत्र की हत्या के समान है। यह वही कांग्रेस है जिसने देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र को कुचलने का काम किया था, और आज हिमाचल में प्रशासक राज लागू कर वही मानसिकता दोहरा रही है।
संदीपनी भारद्वाज ने स्पष्ट चेतावनी दी कि भाजपा लोकतंत्र पर इस हमले को कभी स्वीकार नहीं करेगी। यदि पंचायतों और नगर निकायों में चुनी हुई संस्थाओं की जगह प्रशासक थोपे गए, तो भाजपा प्रदेशभर में आंदोलन करेगी और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

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