शिमला टाइम
भूपेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन ने बताया कि एसजेवीएन के प्रचालनरत विद्युत स्टेशनों ने विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 13302 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन किया हैं।
1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में 7506.617 मिलियन यूनिट के विद्युत उत्पादन को हासिल करके कमीशनिंग के पश्चात से अपना दूसरा सबसे अधिक वार्षिक विद्युत उत्पादन दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि विद्युत स्टेशन ने मार्च 2026 में कुल 150 बिलियन यूनिट के विद्युत उत्पादन को पार करते हुए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 412 मेगावाट रामपुर जलविद्युत स्टेशन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक का सबसे अधिक 2108.034 मिलियन यूनिट का वार्षिक विद्युत उत्पादन दर्ज किया है। यह उत्कृष्ट उपलब्धि, इसके 11 वर्ष के प्रचालनरत इतिहास में पहली बार 2100 मिलियन यूनिट का आंकड़ा पार करने का प्रतीक है। 60 मेगााट नैटवार मोरी जलविद्युत जलविद्युत स्टेशन ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में 310.37 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन दर्ज किया, जो इसके ओएंडएम का द्वितीय वर्ष है। यह विद्युत उत्पादन इसकी डिज़ाइन एनर्जी 265.5 मिलियन यूनिट से 17% अधिक है। इसके अलावा, 1000 मेगावाट बीकानेर सौर ऊर्जा स्टेशन ने दिनांक 19 मार्च 2026 को एक बिलियन यूनिट ऊर्जा उत्पादन का रिकॉर्ड दर्ज किया।
भूपेंद्र गुप्ता ने कर्मचारियों को बधाई दी और भारत सरकार, विद्युत मंत्रालय, उन राज्य सरकारों—जहाँ विद्युत स्टेशन अवस्थित हैं तथा सभी हितधारकों के निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपनी प्रथम परियोजना की कमीशनिंग के बाद से, कंपनी ने राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करते हुए निरंतर विकास किया है।
अजय कुमार शर्मा, निदेशक (कार्मिक), एसजेवीएन ने इस सफलता का श्रेय कर्मचारियों के समर्पण को दिया और इस बात पर बल दिया कि इन परियोजनाओं ने संबंधित क्षेत्रों—विशेष रूप से परियोजना स्थलों के आस-पास के क्षेत्रों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पार्थजित डे, निदेशक (वित्त), एसजेवीएन ने भी कर्मचारियों को बधाई दी और कहा कि ये उपलब्धियाँ संगठन की सुदृढ़ प्रचालन क्षमताओं और देश के ऊर्जा क्षेत्र में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती हैं।
एसजेवीएन, एक नवरत्न सीपीएसई, भारत सरकार के वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है।











