पारंपरिक वस्तु विनिमय व्यापार को बहाल करने के लिए स्थायी समाधान की उठाई मांग
शिमला टाइम, रिकांगपिओ
किन्नौर के शिपकी ला दर्रे के माध्यम से होने वाले पारंपरिक भारत-चीन सीमावर्ती व्यापार पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) का मुद्दा अब भी अनसुलझा है। इससे सदियों पुराना पारंपरिक वस्तु विनिमय व्यापार आर्थिक रूप से अव्यावहारिक हो गया है और व्यापारियों को कारोबार बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हिशे नेगी ने केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और व्यापार को सुचारू रूप से बहाल करने के लिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
एसोसिएशन के अनुसार, करीब छह साल तक बंद रहने के बाद 1 अगस्त 2026 को शिपकी ला के माध्यम से व्यापार दोबारा शुरू होने से ऊपरी किन्नौर के लोगों में रोजगार और आजीविका को लेकर उम्मीद जगी थी। हालांकि, IGST को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं होने से यह उम्मीद पूरी नहीं हो पाई। एसोसिएशन ने चिंता जताई कि 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में भी इस विषय पर प्रकाशित सिफारिशों में कोई विशिष्ट समाधान सामने नहीं आया, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भी इस मामले को उठाया जा चुका है।
सामान्य व्यापार से अलग है शिपकी ला का कारोबार
हिशे नेगी ने पत्र में कहा कि शिपकी ला का व्यापार सामान्य व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि सीमावर्ती जनजातीय समुदायों की सदियों पुरानी आर्थिक और सांस्कृतिक परंपरा है। यह व्यापार मुख्य रूप से वस्तुओं के पारंपरिक आदान-प्रदान पर आधारित रहा है। इसकी सीमित मात्रा, मौसमी प्रकृति, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और परिवहन की पारंपरिक व्यवस्था को देखते हुए इसके लिए व्यावहारिक कर व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने बताया कि आज भी व्यापारियों को खच्चरों के माध्यम से सामान ढोना पड़ रहा है, क्योंकि शिपकी ला व्यापार केंद्र तक जीप योग्य सड़क बनाने की लंबे समय से लंबित मांग पूरी नहीं हुई है। इसके अलावा, पशुधन के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक क्वारंटीन केंद्र की पर्याप्त सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। व्यापार के लिए अनुमत वस्तुओं की सूची सीमित होने से कारोबार के अवसर और कम हो गए हैं। ऐसे में IGST का अतिरिक्त बोझ व्यापार को आर्थिक रूप से नुकसानदेह बना रहा है।
IGST में राहत और नियमों में स्पष्टता की मांग
एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्री से पात्र पारंपरिक वस्तु विनिमय व्यापार के लिए IGST में छूट, कर माफी अथवा कानून के तहत संभव अन्य राहत प्रदान करने का आग्रह किया है। साथ ही, सीमा शुल्क विभाग और संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप में स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि व्यापारियों को कर संबंधी अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
पत्र में 23 जुलाई 1996 की अधिसूचना संख्या 38/96-कस्टम्स और जीएसटी लागू होने के बाद किए गए बदलावों की समीक्षा करने का भी आग्रह किया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐतिहासिक सीमा शुल्क प्रावधानों और मौजूदा कर व्यवस्था का अध्ययन कर ऐसा कानूनी समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे पारंपरिक व्यापार जारी रह सके।
इसके अतिरिक्त, व्यापार की निर्धारित सीमा, अनुमत वस्तुओं और संबंधित शर्तों की समीक्षा करने की मांग की गई है। इसमें महंगाई, मुद्रा के मूल्य में गिरावट, परिवहन लागत और दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है।
बैठक बुलाकर समयबद्ध समाधान निकालने का आग्रह
एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय, जीएसटी अधिकारियों, सीमा शुल्क विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार और व्यापारियों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि सभी पक्षों के विचार लेकर समयबद्ध समाधान निकाला जा सके। साथ ही, शिपकी ला व्यापार केंद्र तक जीप योग्य सड़क का निर्माण जल्द पूरा करने और पशुधन व्यापार के लिए आवश्यक क्वारंटीन सुविधाएं विकसित करने का आग्रह किया है।
हिशे नेगी ने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार सीमावर्ती गांवों के विकास, वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम और सीमा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। लेकिन सीमावर्ती गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल बुनियादी ढांचे का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऊपरी किन्नौर के युवाओं के पास रोजगार के सीमित अवसर हैं। पारंपरिक सीमावर्ती व्यापार स्थानीय लोगों को स्वरोजगार देने, ऐतिहासिक आर्थिक संबंधों को बनाए रखने और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री भी उठा चुके हैं मामला
एसोसिएशन के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी IGST में उचित राहत देने की मांग को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्रालय से संपर्क कर चुके हैं। ऐसे में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि राज्य सरकार और प्रभावित व्यापारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लिया जाए।
हिशे नेगी ने कहा कि शिपकी ला व्यापार को दोबारा शुरू करने की घोषणा तभी सार्थक होगी, जब इससे स्थानीय लोगों को वास्तव में आजीविका मिल सके। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पारंपरिक व्यापार को बचाने के लिए कर संबंधी बाधाओं को दूर किया जाए, ताकि किन्नौर के व्यापारी स्पष्ट नियमों और आर्थिक व्यवहार्यता के साथ अपना कारोबार दोबारा शुरू कर सकें।











