रक्छम क्लाइम्बिंग फेस्टिवल में देश-विदेश के पर्वतारोही ले रहे भाग, स्कूली बच्चों को दिया जा रहा क्लाइम्बिंग का प्रशिक्षण, बर्ड वॉक के जरिए वन्यजीव संरक्षण का संदेश



शिमला टाइम

सांगला घाटी के रक्छम गांव में 10 से 14 अक्टूबर तक पांच दिवसीय रक्छम क्लाइम्बिंग फेस्टिवल 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव में साहसिक पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 15 से 20 प्रतिभागियों के अलावा ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, आइसलैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड और इंग्लैंड से भी 15 से 20 अनुभवी पर्वतारोही भाग ले रहे हैं।
रक्छम माउंटेनियरिंग क्लब के नंदकिशोर उर्फ जोनी और नरेंद्र ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य किन्नौर में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिक प्रतिभागी आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।

बच्चों को मिल रहा पर्वतारोहण का प्रशिक्षण
महोत्सव के दौरान रक्छम के स्थानीय विद्यालय के बच्चों को क्लाइम्बिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें विद्यालय के शिक्षक गौरव अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और साहसिक गतिविधियों के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बर्ड वॉक का भी आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को किन्नौर की पक्षी विविधता और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व से परिचित करवाया जा रहा है।

स्थानीय संस्कृति को भी मिलेगा मंच
महोत्सव में स्थानीय उत्पादों के स्टॉल, क्लाइम्बिंग वर्कशॉप, पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा, पर्वतारोहण से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, हस्तकला और पारंपरिक संस्कृति को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह महोत्सव स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं के कौशल विकास और प्रकृति संरक्षण के साथ जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।


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