130 किलोमीटर का कठिन ट्रैक और आठ लाख रुपये की पुरस्कार राशि, 11 से 68 वर्ष तक के राइडर्स लेंगे हिस्सा
शिमला टाइम
ऐतिहासिक रिज मैदान से शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत (आईएएस) ने हार्टेक्स द्वारा पावर्ड 13वें एमटीबी शिमला 2026 की हेरिटेज राइड को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में देश के करीब 20 शहरों के साइकिलिस्ट हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को लगभग 130 किलोमीटर के चुनौतीपूर्ण पहाड़ी मार्ग पर अपनी क्षमता, संतुलन और सहनशक्ति का प्रदर्शन करना होगा। इसके लिए छह श्रेणियों में कुल आठ लाख रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई है। प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके नौ साइकिलिस्ट भी भाग ले रहे हैं।
मुख्य सचिव के.के. पंत ने माउंटेन बाइकिंग को बढ़ावा देने के लिए हास्टपा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से संस्था प्रदेश में माउंटेन बाइकिंग को प्रोत्साहित कर रही है। हिमाचल प्रदेश सॉफ्ट एडवेंचर पर्यटन के लिए आदर्श गंतव्य है और साइकिलिंग जैसी गतिविधियां प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में देश-विदेश के प्रतिभागियों का शामिल होना खुशी की बात है। प्रदेश सरकार साइकिलिंग के हर पहलू को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साइकिलिंग हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का बेहतरीन माध्यम है।
प्रतियोगिता का 13वां संस्करण इस बार क्रॉस कंट्री मैराथन प्रारूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें एक प्रोलॉग और दो टाइम्ड स्टेज होंगी। इनका कुल मार्ग लगभग 130 किलोमीटर लंबा होगा, जबकि प्रतिभागियों को करीब 3,800 मीटर की कुल चढ़ाई पार करनी होगी। रूट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ऑफ-रोड है, जिसमें सिंगलट्रैक, जंगल के रास्ते, जीप रोड, रॉक गार्डन और नालों की क्रॉसिंग जैसी चुनौतियां शामिल हैं। इस बार पहली बार ग्रेवल बाइक को भी प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी गई है।
23 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे रिज मैदान से प्रोलॉग शुरू होगा। 24 अक्टूबर को पहले चरण ‘द फ्लाइट ऑफ द फेजेंट’ में राइडर्स को 55 किलोमीटर की दूरी और 1,780 मीटर की चढ़ाई पार करनी होगी। यह मार्ग कुफरी वन्यजीव अभयारण्य से पटग्यार, तालो का नाल, मुंडाघाट, थरोल, गालू और फागू होते हुए डाक बंगला तक पहुंचेगा।
25 अक्टूबर को दूसरे चरण ‘द सीडर रीथ’ में 48 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी, जिसमें 1,280 मीटर की चढ़ाई शामिल है। इसका मार्ग कुफरी वन्यजीव अभयारण्य से चराबड़ा, मशोबरा, पुरानी कोटी, कंडा, डाक बंगला, फागू और बेकल्टी होते हुए मशोबरा तक जाएगा। दोनों चरण सुबह नौ बजे शुरू होंगे।
प्रतियोगिता में शिमला, जयपुर, बेंगलुरु, दिल्ली, लेह, गुवाहाटी सहित विभिन्न शहरों के साइकिलिस्ट अंडर-16, अंडर-19, ओपन, मास्टर्स और ग्रैंडमास्टर्स श्रेणियों में हिस्सा ले रहे हैं। शिमला के 11 वर्षीय कारिक शर्मा इस वर्ष के सबसे युवा राइडर हैं, जबकि 68 वर्षीय महेश्वर दत्त सबसे वरिष्ठ प्रतिभागी हैं। शिमला से 18 और बेंगलुरु से छह राइडर्स प्रतियोगिता में उतरेंगे।
युवा प्रतिभागियों में कारिक शर्मा अंडर-16 श्रेणी में अपनी चुनौती पेश करेंगे। शिमला के 19 वर्षीय रूबेन पंजेटा छह वर्षों से पहाड़ी रास्तों पर साइकिलिंग कर रहे हैं और अंडर-19 श्रेणी में भाग लेंगे। वहीं, 18 वर्षीय नित्यम शर्मा सैंडूरो अंडर-18 प्रतियोगिता के विजेता रह चुके हैं और वहां एमेच्योर श्रेणी में ओवरऑल दूसरा स्थान हासिल कर चुके हैं।
जयपुर के 18 वर्षीय अर्णव शर्मा ने नेशनल ट्रायल्स में स्वर्ण पदक जीता है, जबकि बेंगलुरु के 15 वर्षीय स्नेहो रॉय कर्नाटक राज्य रोड रेस में स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं। इन युवा खिलाड़ियों पर भी प्रतियोगिता के दौरान नजर रहेगी।
प्रतियोगिता में सुरक्षित साइकिलिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन ने हास्टपा के साथ ‘पार्टनर्स फॉर सेफ राइडिंग’ के रूप में साझेदारी की है। ‘हेलमेट्स फॉर इंडिया’ पहल के तहत माउंटेन बाइकर्स को ट्रेल पर सही तरीके से हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
हार्टेक्स रबर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक वरुण सुरेका ने कहा कि राइडर्स की जरूरतों के अनुरूप उत्पादों में सुधार किया जा रहा है। राइडर्स की मांग को ध्यान में रखते हुए एक्स-शील्ड तकनीक के साथ 2.4 इंच का एक्सट्रीम-2 टायर पेश किया गया है।
हास्टपा की ओर से वर्ष 2005 में एशिया की पहली एमटीबी स्टेज रेस, एमटीबी हिमालया, शुरू की गई थी। वर्ष 2012 में शुरू हुई एमटीबी शिमला अब देश के माउंटेन बाइकिंग कैलेंडर का महत्वपूर्ण आयोजन बन चुकी है। इस वर्ष प्रतियोगिता हिमाचल पर्यटन के सहयोग से आयोजित की जा रही है। रॉयल एनफील्ड, राडकाट, दैनिक भास्कर और बिग एफएम इसके प्रमुख पार्टनर हैं, जबकि एसजेवीएन, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, एचपीडीटी और प्राणाह भी आयोजन में सहयोग कर रहे हैं।










