लाहौल-स्पीति की 138 पक्षी प्रजातियों पर आधारित ब्रोशर का भी हुआ पुनर्मुद्रण, स्थानीय पक्षी प्रेमियों के योगदान को मिली जगह
शिमला टाइम
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में वन विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। शनिवार को वन्यप्राणी वृत्त शिमला की अरण्यपाल एवं भारतीय वन सेवा की अधिकारी प्रीति भंडारी ने ‘Birds of Kinnaur’ ब्रोशर का विमोचन किया। इसके साथ ही ‘Birds of Lahaul-Spiti’ ब्रोशर का पुनर्मुद्रण भी जारी किया गया।
वन्यप्राणी मंडल सराहन, स्पीति, नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (NCF), Royal Enfield और eBird के संयुक्त सहयोग से तैयार इन दोनों प्रकाशनों में किन्नौर और लाहौल-स्पीति की पक्षी विविधता को वैज्ञानिक तरीके से संकलित किया गया है। ‘Birds of Kinnaur’ में जिले में पाई जाने वाली 173 पक्षी प्रजातियों, जबकि ‘Birds of Lahaul-Spiti’ में 138 प्रजातियों की जानकारी और रंगीन चित्र शामिल किए गए हैं।
इन ब्रोशर का मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों की विशिष्ट पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण करने के साथ विद्यार्थियों, युवाओं, शोधार्थियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को वन्यजीव एवं प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। प्रकाशनों में स्थानीय eBirders और पक्षी प्रेमियों के योगदान को भी विशेष स्थान दिया गया है।
इसमें अल्पना नेगी, शिवानी शर्मा, महेश नेगी, प्रशांत चौहान नेगी, गोपाल नेगी, छाया नंद, अक्षय कुमार, संतोष ठाकुर, शिव कुमार और गरिमा के पक्षी अवलोकनों एवं अभिलेखीकरण में दिए गए योगदान को शामिल किया गया है। इन पक्षी प्रेमियों ने अपने क्षेत्रीय अनुभवों और eBird प्लेटफॉर्म पर दर्ज अवलोकनों के माध्यम से किन्नौर की पक्षी विविधता को संकलित करने में अहम भूमिका निभाई है।
विमोचन कार्यक्रम में HPFS देविंदर चौहान और नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन एवं eBird के वैज्ञानिक डॉ. अजय बिजूर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रीति भंडारी ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के साथ आमजन को जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। इस तरह की चित्रात्मक और ज्ञानवर्धक सामग्री विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें वन विभाग के साथ स्थानीय समुदायों, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने इस पहल के लिए वन्यप्राणी मंडल सराहन, नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन, Royal Enfield, eBird और स्थानीय पक्षी प्रेमियों की सराहना की।

नागरिक विज्ञान को मिलेगा बढ़ावा…
इन प्रकाशनों की खासियत यह है कि इनमें नागरिक विज्ञान (Citizen Science) के माध्यम से आम लोगों द्वारा जुटाई गई जानकारियों को वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण का हिस्सा बनाया गया है। eBird जैसे मंचों पर दर्ज पक्षी अवलोकन प्रजातियों के वितरण, उनकी मौजूदगी और प्राकृतिक आवासों को समझने में मददगार होते हैं। इससे भविष्य में जैव विविधता के अध्ययन और संरक्षण योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी।








