चामुर्थि घोड़ा प्रदर्शनी के लिए पिन वैली और लाहौल-स्पीति से पहुंचे 80 से अधिक घोड़े
शिमला टाइम, रामपुर बुशहर
अंतरराष्ट्रीय लवी मेले में आयोजित होने वाली पारंपरिक चामुर्थि घोड़ा प्रदर्शनी के लिए पिन वैली और लाहौल-स्पीति से 80 से अधिक घोड़े रामपुर पहुंचे हैं। रविवार को लवी मेला मैदान में प्रदर्शनी स्थल पर रौनक देखने को मिली। पशुपालन विभाग ने घोड़ों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, उत्तराखंड के उत्तरकाशी और गढ़वाल क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में खरीदार पहुंचे हैं। इस दौरान चामुर्थि घोड़ों के 93 हजार, 80 हजार और 70 हजार रुपये में सौदे हुए।
लाहौल-स्पीति के कुंगरी निवासी छेवांग टोपगे ने अपना घोड़ा उत्तराखंड के गढ़वाल निवासी नरेंद्र पंवार को 93 हजार रुपये में बेचा। वहीं, स्पीति के मुद निवासी पदमा जिमेट ने शुद्ध स्पीति नस्ल का घोड़ा उत्तरकाशी निवासी विजय पाल को 80 हजार रुपये में बेचा। इसी पशुपालक ने एक अन्य बधियाकृत घोड़ा उत्तरकाशी के यासीन को 70 हजार रुपये में बेचा।
चामुर्थि घोड़ा प्रदर्शनी में खरीद-फरोख्त का सिलसिला जारी है। उत्तराखंड से पहुंचे खरीदारों की मौजूदगी से पशुपालकों में भी उत्साह है। लवी मेले की यह पारंपरिक प्रदर्शनी हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों की पशुधन संस्कृति और पारंपरिक व्यापारिक संबंधों की अहम पहचान बनी हुई है।

मजबूत कद-काठी, सख्त खुर और दुर्गम रास्तों पर चलने की क्षमता इसे बनाती है खास, सेना और आईटीबीपी में भी रहती है मांग
हिमालय के ठंडे मरुस्थल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में खुद को ढालने वाला चामुर्थी घोड़ा अपनी मजबूत कद-काठी, फुर्ती और अद्भुत सहनशक्ति के लिए जाना जाता है। मजबूत शरीर, चौड़ी छाती, ताकतवर टांगें और सख्त खुर इसकी विशेष पहचान हैं। इसके खुर पथरीले, बर्फीले और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों पर अच्छी पकड़ बनाए रखते हैं। अत्यधिक ठंड और कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों में आसानी से चलने की क्षमता इसे अन्य घोड़ों से अलग बनाती है। यही कारण है कि दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही और सामान ढोने के लिए सेना और आईटीबीपी भी इस नस्ल के घोड़ों की मांग करती है।
ठंडे मरुस्थल का मजबूत साथी है चामुर्थी घोड़ा, नस्ल बचाने के लिए लरी में विशेष प्रजनन केंद्र
चामुर्थी नस्ल को विलुप्त होने से बचाने और इसकी संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से लाहौल-स्पीति के लरी में विशेष प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है। वर्ष 2003 में महज 25 चामुर्थी घोड़ों के साथ इस केंद्र की शुरुआत हुई थी। वर्तमान में यहां छोटे-बड़े मिलाकर कुल 66 घोड़े हैं। इनमें पांच साल से अधिक उम्र के 38 घोड़े शामिल हैं।
इस फार्म का मुख्य उद्देश्य चामुर्थी घोड़ों का उचित भरण-पोषण एवं पालन, वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन, सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और इस विशिष्ट नस्ल का संरक्षण करना है। इसके लिए घोड़ों को मौसम के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता है। जून से सितंबर तक चार महीने इन्हें स्पीति के अलग-अलग कंडों (चरागाहों) में भेजा जाता है, जबकि अक्तूबर से मई तक ये लरी स्थित फार्म में रहते हैं। हर साल स्पीति घाटी की 13 पंचायतों के अंतर्गत आने वाले अलग-अलग कंडों में घोड़ों को रखा जाता है। संबंधित पंचायतों के सहयोग से इनके पालन-पोषण और प्रजनन की व्यवस्था की जाती है।
नस्ल के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए फार्म की ओर से ग्रामीणों को प्रजनन के लिए चामुर्थी घोड़े निशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं, ताकि गांवों में भी इस नस्ल का विस्तार हो सके। घोड़ों की मजबूती और दुर्गम रास्तों पर काम करने की क्षमता के चलते सेना और आईटीबीपी में इनकी विशेष मांग रहती है।
इन घोड़ों की निर्धारित सरकारी बुक वैल्यू नर घोड़े के लिए 38,500 रुपये और मादा घोड़े के लिए 32,000 रुपये है। कुछ महीने पहले अवेरी पट्टी आर्मी ने 20 चामुर्थी घोड़े 5 लाख 35 हजार रुपये में खरीदे हैं। जबकि हाल ही में आर्मी ने 10 व 5 चामुर्थि घोड़ो की मांग आईटीबीपी ने भी की थी। ठंडे मरुस्थल की इस अनमोल नस्ल को बचाने के लिए लरी स्थित प्रजनन केंद्र वैज्ञानिक प्रजनन के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।








