सत्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों से ही बनेगा समृद्ध समाज: राजीव कपूर

नाथपा झाकड़ी परियोजना में सतर्कता जागरूकता सप्ताह का समापन, विद्यार्थियों की रचनात्मकता ने दिया ईमानदारी का संदेश

शिमला टाइम

ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही केवल किसी संस्थान के संचालन तक सीमित मूल्य नहीं हैं, बल्कि एक सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की बुनियाद हैं। यदि सत्यनिष्ठा को दैनिक जीवन और कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए तो विकास की राह और मजबूत हो सकती है। इसी संदेश के साथ एसजेवीएन के 1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन में आयोजित सतर्कता जागरूकता सप्ताह का समापन हुआ।केंद्रीय सतर्कता आयोग एवं निगम सतर्कता विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 26 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित इस सप्ताह की थीम ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ रही। समापन समारोह परियोजना प्रमुख राजीव कपूर की उपस्थिति में आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष भी मौजूद रहे।सप्ताह भर चली गतिविधियों में विद्यार्थियों, कर्मचारियों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्नोत्तरी, नारा लेखन, भाषण, पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग और रंगोली प्रतियोगिताओं के माध्यम से सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया। खास बात यह रही कि इन गतिविधियों में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा के जरिए भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और जिम्मेदार नागरिकता की अहमियत को सामने रखा।समापन समारोह में परियोजना प्रमुख राजीव कपूर ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि सत्यनिष्ठा महज एक आदर्श या विचार नहीं, बल्कि इसे अपने व्यवहार और कार्यसंस्कृति में उतारना जरूरी है।

ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्य ही किसी सशक्त संस्थान और समृद्ध समाज की नींव रखते हैं।उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में नैतिक मूल्यों और ईमानदारी के संस्कार विकसित करना समय की आवश्यकता है। आज के विद्यार्थी ही कल के जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र निर्माता बनेंगे। ऐसे आयोजनों से बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक आचरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने महिलाओं की ओर से तैयार की गई आकर्षक रंगोलियों की भी सराहना की।समारोह के अंत में विभिन्न विद्यालयों के विजेता प्रतिभागियों को राजीव कपूर ने पुरस्कार एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि समृद्धि का वास्तविक आधार केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि समाज में ईमानदारी, विश्वास और नैतिक जिम्मेदारी की मजबूत संस्कृति भी है।

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